Difference Between HVAC and HVDC Power Transmission

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Difference Between HVAC and HVDC

एक generating station  पे बिजली पैदा करने के बाद पैदा होने वाली बिजली को electrical substation पर ट्रंजमिशन के जरिये भेज दिया जाता है फिर यहाँ से इसे उपभोक्ताओं को वितरित किया जाता है। लंबी दूरी के power transmission के लिए high voltage का इस्तेमाल किया जाता है। आज इस पोस्ट मे हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि लंबी दूरी के power transmission के लिए high voltage आवश्यकता क्यों होती है। इसके अलावा, हम AC या DC किस रूप मे power transmission कर सकते है।

ट्रांसमिशन के लिए हाई वोल्टेज क्यों जरूरी है?

High voltage लाइन लॉस जिसे हम transmission losses भी कहते हैं उसको कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रत्येक electrical conductor जो हम power transmission के लिए उपयोग करते हैं, उनका कुछ ना कुछ प्रतिरोध जरूर होता है जिसको R से दर्शाया जाता है। जब इन कंडक्टर के माध्यम से current (I) का प्रवाह किया जाता है तो ये कंडक्टर गर्मी उत्पन्न करते हैं, जो असल में और कुछ नही सिर्फ पावर (P) बर्बादी है।

Ohms law के अनुसार:-

                        V = I x R

पावर का सूत्र:-

                           P = I x V

V = I x R कि वैल्यू डालने पे:-

                        P = I x (I x R)

                        P = I2R

जैसा कि आप ऊपर दिखाए समीकरण मे देख सकते हैं कि ट्रांसमिशन के दौरान कंडक्टर में बर्बाद होने वाली पावर current पर निर्भर करती है, न कि वोल्टेज पर। लेकिन हम current की मात्रा को बढ़ाने या घटाने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग करके voltage conversion का उपयोग कर सकते हैं।

वोल्टेज के conversion के दौरान पावर परिवर्तित नहीं होती है। केवल वोल्टेज और करंट में कमी या वृद्धि होती है। अर्थात्:-

                     P = I x V

उदाहरण के लिए, 220 वोल्ट पर 11KW  पावर में 50A होते हैं। ऐसे में ट्रांसमिशन लाइन लॉस निम्मनलिखित होगा

P = I2R = (50)2R = 2500 R

10 के फैक्टर से वोल्टेज को बढ़ाएं। तो 11KW की समान पावर में 2200v और 5 Amps का वोल्टेज होगा। अब लाइन लॉस ये होगा:-

P = (5)2R = 25 R

जैसा कि आप देख सकते हैं, समीकरण के अनुसार वोल्टेज बढ़ाने से ट्रांसमिशन लाइनों में power losses काफी कम हो जाता है। इसलिए विद्युत संचरण की समान मात्रा को बनाए रखते हुए ट्रांसमिशन करते समय करंट को कम करने के लिए, हम वोल्टेज बढ़ाते हैं।

AC Current VS DC Current

1880 के दशक के दौरान, DC transmission पहली बार सामने आया था, लेकिन इसके voltage conversion के लिए उपकरणों की कमी जैसे कि एक ट्रांसफार्मर जो आसानी से कम वोल्टेज से उच्च वोल्टेज में बदले, इसके कारण ये ज्यादा सफल साबित नही हुआ। इस समय पे कुछ कम वोल्टेज डीसी जनरेटिंग स्टेशन ही होते थे जो केवल कुछ किलोमीटर के दायरे में ही बिजली की आपूर्ति कर सकते थे, उससे आगे ले जाने पे  वोल्टेज में काफी गिरावट आ जाती थी। इस प्रकार से एक छोटे से क्षेत्र में आपूर्ति के लिए ही बहुत सारे generating stations की आवश्यकता होती थी जोकि बहुत महंगा पड़ता था।

HVAC & HVDC

HVAC का मतलब Voltage Alternating Current है जबकि HVDC का मतलब High Voltage Direct Current होता है। ये AC (HVAC) या DC (HVDC) सिस्टम आम तौर पर लंबी दूरी तक बिजली का संचारण करने के लिए उपयोग की जाता है। हालांकि, HVDC का उपयोग आमतौर पर 600 किलोमीटर से अधिक दूरी पर बिजली पहुंचाने के लिए किया जाता है।

आजकल पूरे विश्व में HVAC & HVDC दोनों प्रकार के पॉवर ट्रांसमिशन का उपयोग किया जाता है। जबकि इन दोनों में कुछ फायदे और नुकसान दोनों ही हैं, हम उनमें से प्रत्येक पर संक्षेप में आपको बताएँगे।

Cost of Transmission

जैसा कि हमने अभी बताया कि लंबी दूरी क लिए बिजली संचारण करने के लिए उच्च वोल्टेज की आवश्यकता होती है। बिजली terminal stations के बीच गुजरती है जो वोल्टेज के स्तर को बदलते हैं। इसलिए ट्रांसमिशन की कुल लागत terminal stations और transmission line की लागत पर निर्भर करती है।

Terminal Station

high voltages, electrical terminal stations के बीच संचारित होती हैं और electrical terminal stations का कम voltage conversion का होता है। AC के मामले में, इन electrical terminal stations पर voltage conversion के लिए जो उपकरण उपयोग किए जाते हैं वो मुख्य रूप से ट्रांसफार्मर होते हैं जो high और low Voltage को बदलते हैं। जबकि DC के मामले में, terminal stations high और low DC वोल्टेज के बीच बदलाव के लिए thyristor या IGBT आधारित कन्वर्टर्स का उपयोग किया जाता है।

लेकिन ट्रांसफार्मर इन कन्वर्टर्स की तुलना में अधिक विश्वसनीय और सस्ते होते हैं, इसलिए AC terminal stations, DC terminal station की तुलना में सस्ते होते हैं। इसलिए, AC में voltage conversion DC  के मुक़ाबले सस्ता पड़ता है।

Transmission Line

ट्रांसमिशन लाइन की लागत इसमे  इस्तेमाल किए जाने वाले कंडक्टरों की संख्या और ट्रांसमिशन टॉवर की लागत पर भी निर्भर करती है।

ट्रांसमिशन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कंडक्टरों की बात करे तो, HVDC transmission मे केवल दो कंडक्टरों की ही आवश्यकता होती है, जबकि HVAC transmission सिस्टम मे 3 या 3 से अधिक कंडक्टरों की आवश्यकता होती है।

अधिक कंडक्टरों के कारण transmission tower पर mechanical  भार अधिक पड़ने के कारण, उनकी नीव और उसके support को अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता होती है, और ये HVDC transmission towers की तुलना में ज्यादा चौड़ा और लंबा भी होना चाहिए। साथ ही ट्रांसमिशन लाइन की लागत दूरी के साथ भी बढ़ती जाती है।

Overall Cost of Transmission

चूंकि ट्रांसमिशन की लागत टर्मिनल की लागत (टर्मिनल लागत स्थिर रहती है) और लाइन की लागत (लाइन लागत दूरी के साथ बढ़ती है) पर निर्भर करती है। इसलिए, ट्रांसमिशन सिस्टम की कुल लागत दूरी के साथ बढ़ती जाती है

वो संचारण दूरी (transmission distance) जिस पर HVAC मे HVDC की तुलना में कुल निवेश की लागत में वृद्धि शुरू होती है, उसे Break-even Distance कहा जाता है। यह अनुमानित दूरी लगभग 600-800 किलोमीटर क होती है। Break-even distance के बाद पावर ट्रांसमिशन के लिए HVDC एक बेहतर विकल्प होता है। और इस दूरी के नीचे HVAC, HVDC के मुक़ाबले अधिक किफायती है। यह आप ऊपर दिए गए ग्राफ को देख के आसानी से समझ सकते हैं।

Flexibility

जहां से HVDC transmission का उपयोग लंबी दूरी के लिए दो जगाहों के बीच संचारण के लिए किया जाता है, उसके बाद बीच मे हम किसी भी जगह पर पावर एनएच नही ले सकते क्योंकि इस तरह के HVDC को स्टेप डाउन करने के लिए एक महंगे कनवर्टर की आवश्यकता होगी। जबकि HVAC ट्रांसमिशन मे HVAC को स्टेप डाउन करने के लिए टर्मिनल स्टेशनों पर ट्रांसफार्मर जैसे सस्ते उपकरणों का उपयोग करके बीच मे पावर का इस्तेमाल कर सकते हैं और यही बात HVAC सिस्टम को लचीलापन (flexibility) प्रदान करता है।

Power Losses

HVAC power transmission मे हमको Corona losses, skin effect, radiation losses, Induction losses आदि जैसे कई पावर लॉस देखने को मिलते हैं।

जब HVAC संचारण लिने मे वोल्टेज एक निश्चित सीमा से ऊपर संचारित किया जाता है, तो कंडक्टर के आसपास की हवा आयनीकरण चिंगारी उत्पन्न होने लगती है जिस से पावर का लॉस होता है,  इसे कोरोना डिस्चार्ज कहा जाता है। कोरोना डिस्चार्ज के कारण होने वाले नुकसान आवृत्ति (frequency) पर निर्भर करते हैं और जैसे कि हम जानते हैं डीसी कि आवृत्ति ज़ीरो होती है, तो ऐसे मे HVDC में कोरोना नुकसान HVAC की तुलना में लगभग 3 गुना कम होता है।

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एक चालक में AC करंट का प्रवाह इस तरह से विभाजित होता है कि करंट का घनत्व कंडक्टर की सतह पर सबसे ज्यादा रहता है और चालक के केंद्र में AC करंट का प्रवाह कम होता है, इसे skin effect कहा जाता है। चूंकि चालक के क्रॉस-सेक्शनल क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा अप्रभावी रहता है और जैसा कि हम जानते हैं प्रतिरोध (R) सीधे क्रॉस-सेक्शनल के directly proportional होता है, तो ऐसे मे कंडक्टर का प्रतिरोध बढ़ जाता है। हालांकि, कंडक्टर में DC करंट समान रूप से वितरित हो जाता है क्योंकि skin effect केवल frequency पर निर्भर करता है। इसलिए, skin effect के कारण केवल HVAC ट्रांसमिशन मे ही पावर लॉस होता है।

HVAC कंडक्टर के आसपास बदलते चुंबकीय क्षेत्र के कारण radiation & induction losses  होते हैं। ज्यादा लंबा कंडक्टर एक ऐन्टेना की तरह काम करना शुरू कर देता है और कुछ पावर को लाइन से बाहर निकालता है जो वापस नहीं लौटती है, जबकि लगातार बदलते चुंबकीय क्षेत्र के कारण आस पास वाले कंडक्टर में प्रेरण प्रेरित (current induced) होने पर भी पावर का नुकसान होता है। जबकि DC में चुंबकीय क्षेत्र एक समान रहता है, HVDC ट्रांसमिशन इस तरह के कोई नुकसान नहीं होते।

The Skin Effect

skin effect के कारण कंडक्टर अपनी सतह पर ज़्यादातर करंट ले जाता है और कोर में बहुत कम करंट फ्लो करता है। यह frequency पर निर्भर करता है और यह सीधे इसके directly proportional होता है। यह उपयोग किए जा रहे कंडक्टरों की दक्षता (efficiency of the conductors) को कम कर देता है। इसलिए, ज्यादा करंट की आपूर्ति करने के लिए, कंडक्टर के क्रॉस-सेक्शनल क्षेत्र को बढ़ाने की आवश्यकता होगी।

इस प्रकार HVAC मे HVDC की तुलना में समान मात्रा मे करंट की आपूर्ति के लिए एक बड़े व्यास के कंडक्टर की आवश्यकता पड़ती है।

Current & Voltage Ratings of Cable

जैसा कि हम जानते हैं, एक केबल की वोल्टेज और करंट सहन करने की भी एक अधिकतम  सीमा होती है। AC में वोल्टेज और करंट का एक पीक होता है जो वास्तव में उसके औसत (actual average power delivered) या उसके DC मान से 1.4 गुना ज्यादा होता है। लेकिन डीसी में पीक और औसत दोनों ही समान होते हैं।

हालांकि, HVAC  ट्रांसमिशन के लिए कंडक्टर को पीक करंट और वोल्टेज के लिए रेट किया जाना चाहिए, ताकि कंडक्टर की पूरी क्षमता का उपयोग किया सके, जो कि HVDC ट्रांसमिशन की तुलना में लगभग 30% बर्बाद करता है करता है। जैसा कि पहले बताया था एक ही आकार का एक कंडक्टर HVAC के मुक़ाबले अधिक HVDC पावर ले जा सकता है।

Controllability of Power Flow

HVAC के पावर फ्लो मे नियंत्रणीयता का अभाव होता है जबकि HVDC मे IGBTs आधारित सेमीकंडक्टर कन्वर्टर्स का उपयोग करते। हालाँकि, ये कन्वर्टर्स काफी जटिल होते हैं, लेकिन यह पूरे सिस्टम को बिजली के वितरण को अनुकूलित करने में मदद करता है और हार्मोनिक को भी सही करता है। ये नियंत्रित इलेक्ट्रॉनिक कन्वर्टर्स HVDC प्रणाली मे लाइन फ़ाल्ट आदि कि हालत मे सुरक्षा प्रदान करते हैं

Interlink between Asynchronous systems & Smart Grid

एक स्मार्ट ग्रिड का फायदा यह है कि प्रत्येक जनरेटिंग स्टेशन combined grid system को बिजली की आपूर्ति कर सकता है। ये छोटे ग्रिड का उपयोग कर अधिक मात्रा में बिजली बनाने में मदद करता है लेकिन कई asynchronous AC grids को जोड़ना काफी कठिन है।

Asynchronous Interconnection

frequency के अनुसार, कुछ देश 50 Hz की frequency का उपयोग करते हैं जबकि कुछ देश 60 Hz की frequency का उपयोग करते हैं। इसके अलावा, दो अलग-अलग पावर ग्रिड में एक ही आवृत्ति हो सकती है लेकिन वे out of phase हो सकते हैं। इस तरह के सिस्टम को asynchronous सिस्टम कहा जाता है। इन पावर ग्रिड को एक सामान्य AC interlink का उपयोग करके एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता है।

जहां तक DC का जुड़ी है, कोई phase या frequency नहीं होती। इसलिए HVDC interlink आसानी से ऐसे asynchronous पावर ग्रिड को आसानी से इंटरकनेक्ट कर सकता है। HVDC interlink AC को DC में बदलता है जिसकी कोई frequency नहीं होती, और इसे आसानी से किसी भी अन्य HVDC के साथ जोड़ा जा सकता है और इसे receiving terminal पर भेजा जा सकता है जहां HVDC इनवर्टर इसे वापस AC में बदल देते हैं।

Circuit Breaker:

हाई वोल्टेज पावर ट्रांसमिशन में सर्किट ब्रेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपकरण होता है। यह किसी भी fault या maintenance के समय पूरे सर्किट को de-energizes करने का करता है। सर्किट ब्रेकर मे बिजली की आपूर्ति को रोकने के लिए arc-extinguish की क्षमता होनी जरूरी है।

HVAC के मामले में, फ्रिक्वेंसी के कारण करंट की दिशा लगातार बदलती रहती है जिसके कारण एक सेकंड में कई बंद होने के कारण के कारण अर्क को खत्म करने के लिए कई मौके मिलते हैं। जबकी DC में unidirectional होने क कारण इसमे करंट कभी भी ज़ीरो नहीं होता, इस लिए अर्क को बुझाने के लिए विशेष सर्किट का उपयोग किया जाता है।

इसलिए, “arc-extinguish” क्षमता के कारण HVAC के लिए सर्किट ब्रेकर डिजाइन करना आसान है। जबकि HVDC के लिए, सर्किट ब्रेकर डिजाइन करना काफी जटिल है और साथ ही HVDC सर्किट ब्रेकर्स HVAC  सर्किट ब्रेकर की तुलना में काफी महंगे भी होते हैं।

Generating Interference

अल्टरनेटिंग करंट एक continuously परिवर्तनशील चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है जो आस-पास के communication conductors में interference का कारण बन सकता है। जबकि DC में एक समान magnetic field बनता है और यह इस तरह के interferences का कारण नहीं बनता।

Main Differences Between HVAC and HVDC
HVACHVDC
HVAC का मतलब High Voltage Alternating Current होता है।HVDC का मतलब High Voltage Direct Current होता है।
इसमे voltage conversion के लिए  transformer का इस्तेमाल किया जाता है।इसमे voltage conversion के लिए solid-state semiconductor based converters का उपयोग किया जाता है।
HVAC का conversion बहुत ही आसान और सस्ता है।HVDC का conversion बहुत ही जटिल और महंगा होता है।
HVAC transmission कम से कम 3 conductors की जरूरत पड़ती है।HVDC के मामले मे bipolar मे 2 और monopolar transmission मे सिर्फ 1 conductor की जरूरत पड़ती है।
HVAC transmission 600 Km तक की दूरी तक इस्तेमाल किए जाते हैं।HVDC transmission 600Km से ज्यादा की दूरी पे इस्तेमाल किए जाते हैं।
HVAC को transmission के बीच मे कही भी इस्तेमाल किया जा सकता है।HVDC सिर्फ point to point transmission मे ही इस्तेमाल की जा सकती है।
कंडक्टर कोरोना के नुकसान से प्रभावित होते हैं।HVDC  मे corona losses HVAC के मुक़ाबले लगभग 3 गुणा कम होता है
यह skin इफैक्ट के कारण एक बड़े व्यास के केबल की आवश्यकता होती है।करंट केबल में एक समान रहता है इस प्रकार से इसमे तुलनात्मक रूप से छोटे व्यास के केबल का उपयोग कर सकता है।
HVAC transmission बड़े आकार के टावर की जरूरत पड़ती है।HVDC transmission मे छोटे आकार के टावर की जरूरत होती है।
It is not preferred for submarine or underwater power transmission due to the stray capacitance of the cables.The HVDC is preferred & used for submarine power transmission offshore.
AC पावर communication lines के पास interference बनाती है।DC किसी प्रकार का कोई  interference नहीं बनाती।
voltage zero-crossing के कारण लाइन अर्क बुझ सकता है।जब तक पावर स्रोत को ट्रिप नहीं किया जाता तब तक आर्क को बुझाने का मौका नहीं मिलता।
HVAC arc के self-extinguish के कारण circuit breakers साधारण और सस्ते होते हैं।HVDC circuit breakers काफी जटिल और महंगे होते हैं।
HVAC 600 km तक overhead power transmission के लिए बहुत सस्ती पड़ती है।HVDC 600km से ज्यादा दूरी क लिए इस्तेमाल की जाती है साथ ही इसका उपयोग underwater transmission मे भी किया जाता है।
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