Chilled Water System and Refrigeration Cycle [हिंदी]

आज की पोस्ट में हम Chilled Water System के बारे में डिटेल में जानेगें। यहाँ हम Chilled Water System की चारों भागों के बारे में पढेंगे।

Chilled Water System में चार भाग होते है जोकि नीचे दिए गए हैं।
Refrigeration Cycle
Chilled Water Cycle
Air Cycle

इनके बारे में अच्छे से बताने से पहले मोटा मोटा जान लेते हैं। शुरुवात करते हैं Refrigeration Cycle से इसके मुख्य भाग Compressor, Shell and Tube type Condenser, Expansion Valve और Chiller.
Chilled Water Cycle के मुख्य भाग हैं Primary Pump, Chiller, Secondary Pump और AHU.

Air Cycle के मुख्य भाग AHU जिसमे Cooling Coil और Blower होता है फिर Blower से डक्ट के द्वारा हवा जाती है डक्ट के लास्ट में डिफ्यूजर लगा होता है जो उस जगह में होता है जिसको हमने ठंडा रखना होता है। फिर इसमें एक Return Air Duct आ जाता है जोकि Air Exhaust का काम भी करती है।

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Condenser Water Cycle के मुख्य भाग होते हैं Condenser Pump, Shell and Tube type Condenser और Cooling Tower ये चारों भाग Chilled Water System में काम करते हैं।

इसके बाद हम इन सबके बारे में अच्छे से जानेगें।

Refrigeration Cycle

Refrigeration Cycle में मुख़्य भाग Compressor होता है जो Refrigerant को दबाने यानि कंप्रेस करने का काम करता है। कंप्रेस होने के बाद जो हाई टेम्परेचर हाई प्रेशर का Refrigerant Condenser में चला जाता है। Chilled Water System में जो Condenser इस्तेमाल होते है वो ज्यादातर Shell and Tube type होते हैं, इसकी Shell में Refrigerant होता है और ट्यूब में पानी होता है तो अब क्या होता है Shell में हाई टेम्परेचर हाई प्रेशर का Refrigerant है उसका तापमान लगभग 110°F होता है और ट्यूब में जो पानी होता है उसका तापमान लगभग 90°F होता है।

अब पानी का तापमान कम है और Refrigerant का तापमान ज्यादा है तो Refrigerant अपनी गर्मी पानी को दे देगा जिसकी वजह से Refrigerant ठंडा हो जायेगा और पानी गर्म होके बाहर Cooling Tower की तरफ जाएगा। अब Refrigerant ठंडा होने बाद तरल में बदल जाता है और ये Condenser से निकल के Expansion Valve में आयेगा। अब Expansion Valve का काम है Refrigerant के प्रेशर को कम करना, अब जो लौ टेम्परेचर लौ प्रेशर का Refrigerant Chiller में आएगा, ये चिलर भी Shell and Tube type है

लेकिन इसकी Shell में पानी होता है और इसकी ट्यूब में Refrigerant होता है जिसका तापमान लगभग 40°F होता है। जब पानी Chiller के Shell में आता है तो इसका तापमान 54°F होता है और जब ये Refrigerant के संपर्क में आके ठंडा हो जाता है तो इसका तापमान 44°F एक आ जाता है। अब पानी के संपर्क में आने पे Chiller की ट्यूब वाला Refrigerant गर्म होके वापस भाप या वाष्प में बदल जाता है जोकि फिर से Compressor में चला जाता है, और ये प्रक्रिया लगातार चलती है। इस तरह से Refrigeration Cycle काम करती है।

Chilled Water Cycle

जैसा की मैंने पहले बताया था के Chilled Water Cycle के मुख्य भाग हैं Primary Pump, Chiller, Secondary Pump और AHU होते है तो अब जो Primary Pump है वो AHU पे पानी को खिंचेगा, और ये पानी Chiller के Shell में आयेगा तो जैसा के पहले बताया था Chiller की ट्यूब में ठंडा Refrigerant है तो ये पानी भी ठंडा हो जायेगा, इसके बाद इस ठन्डे पानी को Secondary Pump खिंच के AHU में पहुचाता है।

AHU की जो कॉइल होती है उसे ये ठंडा पानी बहता है, और  AHU का ब्लोअर जब हवा खींचता है तो वो हवा इस कॉइल के संपर्क में आप से ठंडी हो जाती है यानि हवा का तापमान कम हो जाता है, और कॉइल का पानी हवा की गर्मी सोंख लेने के बाद गर्म होके (54°F) वापस Chiller में चला जाता है और ये Cycle ऐसे ही चलता रहता है। Chilled Water Cycle में एक भाग और होता है जिसको Expansion Tank कहते हैं,

जब  हम Chiller चलाते हैं तो पानी का तापमान कम हो जाता है तो पानी की मात्रा भी कम हो जाता है और जब Chiller को बंद करते हैं तो पानी गर्म होने से पानी की मात्रा भी बढ़ जाती है। अब ये जो पानी कम और ज्यादा होता है उसको बनाये रखने के लिए Expansion Tank काम में आता है। अगर ये न हो तो जब पानी बढेगा तो लाइन का प्रेसर ज्यादा हो जाएगा जिस से पाइप लाइन के फटने का खतरा होता है।

Air Cycle

Air Cycle के मुख्य भाग AHU जिसमे Cooling Coil और Blower होता है फिर Blower से डक्ट के द्वारा हवा जाती है डक्ट के लास्ट में डिफ्यूजर लगा होता है जो उस जगह में होता है जिसको हमने ठंडा रखना होता है। फिर इसमें एक Return Air Duct आ जाता है जोकि Air Exhaust का काम भी करती है।

सबसे पहले उसमे जो Blower होता है वह वापस आने वाली हवा (Return Air) को खिंचता है जिसका तापमान लगभग 75 से 80°F होता है वैसे जो हवा वापस खिंची जाती है उसका तापमान लगभग 70 से 75°F के आस पास होता है लेकिन इसमें हम बाहर से कुछ ताजा हवा (Fresh Air) भी मिलते हैं जिसके कारण इसका तापमान लगभग 5 से 10°F के आसपास और ज्यादा बढ़ जाता है बाहर से ताज हवा (Fresh Air) हम इसलिए मिलाते हैं कि ताकि हमारे रूम के अंदर की जो हवा है उसमें ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहे और इसकी कोई भी कमी ना हो

और जब AHU का Blower इस हवा को खिंचता है तो ये AHU की कॉइल से पास होती है और जैसा कि हमने पहले बताया था इसमें जो कॉइल लगी हुई होती है उसमें जो पानी होता है वह चिल्लर से आया हुआ ठंडा पानी होता है जिसका तापमान लगभग 44°F के आस पास होता है जो कि हवा से ठंडा होता है और यह हवा की गर्मी अपने आप में ले लेता है और हवा को ठंडी कर देता है तो इससे हवा का तापमान लगभग 54°F के आस पास हो जाएगा और यह जो ठंडी हवा है इसको ब्लोवर सप्लायर डक्ट में भेज देगा और जब यह डक्ट से होते हुए रूम में जाती है वहाँ पर डिफ्यूजन या फिर जाली लगी हुई होती है वहां से बाहर निकलती है तो तब इसका तापमान लगभग 60 से 65°F तक पहुंच जाता है।

यह जो हवा बाहर निकलती है इसे हम प्राइमरी एयर कहते हैं ये रूम की एयर साथ मिल जाती है। कमरे की जो हवा होती हैं हम उसे सेकेंडरी एयर कहते है और जब प्राइमरी और सेकेंडरी एयर दोनों मिक्स हो जाते हैं तो उसका टेंपरेचर फिर से लगभग 75°F के पास पहुंच जाता है और उसके बाद ये हवा रिटर्न एयर डक्ट के द्वारा खिंच ली जाती है लेकिन इसके बीच में जैसा कि हमने बताया था एग्जॉस्ट लगा होता है उसके द्वारा हम कुछ जो हवा बाहर फेंक देते हैं ताकि हवा में जो कुछ अशुद्धियां घुल गई होती हैं वह बाहर निकल जाएं और थोड़ी बहुत इसमें से बाहर निकलने के बाद वह वापस हमारे AHU में आ जाती है और यह Cycle इसी तरह से चलता रहता है

Condenser Water Cycle

Condenser Water Cycle के मुख्य भाग होते हैं Condenser Pump, Shell and Tube type Condenser और Cooling Tower तो इसमें क्या होता है इसमे जो Condenser Pump है यह Cooling Tower से ठंडे पानी को खींचेगा जिसका तापमान लगभग 90°F होता है और यह जो पानी है वह Condenser की ट्यूब में से बहता हुआ जाएगा Condenser का जो Shell है इसमें हाई टेंपरेचर हाई प्रेशर का Refrigerant है जिसका तापमान लगभग 110°F के आस पास होता है Refrigerant का तापमान ज्यादा है

और जो पानी इसकी ट्यूब में से बह रहा है उसका तापमान कम है तो ऐसे में Refrigerant अपनी गर्मी पानी को दे देगा और उसके कारण Refrigerant ठंडा हो जाएगा और पानी का तापमान 100°F तक पहुंच जाता है जरूरी नहीं है यही तापमान  हर जगह हो ये अलग अलग हो सकता है लेकिन जो Delta-T है वो एक रहेगा। ज्यादातर Delta-T लगभग 10°F होता है।

अब यह 100°F तापमान वाला पानी Cooling Tower में आएगा और यहां पर आकर नोज़ल्स से Cooling Tower में गिरने लगेगा। उसके बाद Cooling Tower में एक पंखा लगा होता है जो कि हवा को खिंचता है यहां पर हवा का तापमान 85°F के आसपास होता है तो इस हवा के संपर्क में आते ही पानी का तापमान कम हो जाएगा और इवेपरेशन होते ही वह ठंडा होकर कूलिंग टावर के नीचे जो टैंक होता है उसमें जमा हो जाएगा और यह पानी वापस Condenser Pump खींच कर इसको Condenser में भेज देगा और यह प्रक्रिया ऐसे ही चलती रहती हैं।

Refrigerant के प्रेसर के बारे में हमने नीचे तालिका में बताया है।

Refrigerant Table
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